बाबरी मस्जिद मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला पूरी तरह गलत था, उद्घाटन समारोह में पीएम मोदी के शामिल होने की खबर पर मौलाना महमूद मदनी की तीखी प्रतिक्रिया।

नई दिल्ली: जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने आगमी 22 जनवरी 2024 अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित भागीदारी और कुछ मुस्लिम नेताओं द्वारा प्रस्तावित मस्जिद की नींव रखने के लिए प्रधानमंत्री से अपील करने पर तीखी आलोचना की है। मौलाना मदनी ने अपने बयान में कहा कि हम स्पष्ट रूप से यह कहना चाहते हैं कि अयोध्या विवाद में सुप्रीम कोर्ट के जो निर्णय किया था, हम उसको सही नहीं मानते हैं। 

शुक्रवार को मौलाना मदनी ने अपने बयान में कहा कि जमीअत उलमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी कि यह फैसला गलत माहौल में गलत सिद्धांतों और आधारों पर दिया गया है, जो कानूनी और ऐतिहासिक तथ्यों के भी विरुद्ध है। मौलाना मदनी ने कहा कि ऐसे में देश के प्रधानमंत्री को किसी भी पूजा स्थल के उद्घाटन के लिए बिलकुल नहीं जाना चाहिए बल्कि उचित यह है कि धार्मिक अनुष्ठान राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त हों और धार्मिक लोगों द्वारा ही किए जाने चाहिएं।
मौलाना मदनी ने इस अवसर पर जमीअत उलमा के सभी स्तरों के पदाधिकारियों को खबरदार किया कि वह जमीअत उलमा के रुख के खिलाफ किसी भी गैरजिम्मेदाराना बयान से बचें। 
बता दें कि टाइम्स ऑफ इंडिया में जमीअत के किसी स्थानीय पदाधिकारी के हवाले से प्रधानमंत्री से मस्जिद के उद्घाटन में शामिल होने की अपील पर आधारित एक बयान प्रकाशित किया गया है, जो जमीअत की रुख के विरुद्ध है। 

समीर चौधरी।

Post a Comment

0 Comments

देश