दारुल उलूम वक्फ देवबंद में खत्म बुखारी शरीफ के मौके पर दुआ में बड़ी संख्या में शामिल हुए लोग, उलेमा ने दी बच्चों को इस्लाम की सही तस्वीर दुनिया के सामने रखने की नसीहत।

देवबंद: देवबंद में स्थित इस्लामी तालीम के दूसरे बड़े इदारे दारुल उलूम वक्फ में हदीस शरीफ की सबसे बड़ी किताब बुखारी शरीफ का खत्म हुआ। इसमें छात्रों को बुखारी का अंतिम पाठ पढ़ाया गया साथ ही छात्रों को उनकी ज़िम्मेदारी का अहसास कराया गया। दुआ में शामिल होने के लिए दूर दराज से लोग यहां पहुंचे थे। 

गुरुवार को दारुल उ‍लूम वक्फ में शेखुल हदीस सैयद मौलाना अहमद खिजर शाह मसूदी ने छात्रों को बुखारी का अंतिम पाठ पढ़ाया और छात्रों से इस्लामी तालीम को दुनिया के कोने कोने में फैलाने का आह्वान किया। मौलाना ने कहा कि जो लोग इल्म सीखते हैं उनकी जिम्मेदारी हो जाती है कि वह उस इल्म को दूसरों तक पहुंचाए। इल्म ही एक मात्र ऐसी चीज है जो बांटने से बढ़ता है। कहा कि कुरआन के बाद बुखारी शरीफ को दूसरा दर्जा हासिल है। हजरत इमाम बुखारी की मेहनत और जहनियत का फायदा आज भी दुनिया उठा रही है। 

अध्यक्षता कर रहे संस्था के मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमी ने कहा कि छात्र मौजूदा दौर में इस्लाम की सही तस्वीर दुनिया के सामने पेश करें और पूरी ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभाएं। कार्यक्रम में कई लोगों के निकाह भी पढ़ाए गए। अंत में मौलाना अहमद खिजर ने मुल्क में अमनो अमान और भाईचारे के लिए दुआ कराई। शुरुआत कारी वासिफ की तिलावत-ए-कलाम पाक से हुई। संचालन मुफ्ती अहसान ने किया। इसमें मौलाना अनवार बिजनौरी, मौलाना नदीमुल वाजदी, मौलाना बिलाल, सैयद वजाहत शाह, मौलाना सिकंदर, अब्दुल्ला खां, मौलाना साकिब, रिजवान सलमानी सहती बड़ी संख्या में दूर दराज से लोग शामिल हुए।

समीर चौधरी।

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