श्रद्धा व उत्साह से मनाया गया गुरू गोबिंद सिंह जी का प्रकाश पर्व।

देवबंद: साहिब श्री गुरू गोबिंद सिंह जी महाराज का प्रकाश पर्व श्रद्धा व उत्साह से मनाया गया। रागी जत्थों ने गुरवाणी गायन कर संगत को निहाल किया।

कार्यक्रम में संगत को सम्बोधित करते हुए हजूरी रागी भाई गुरदयाल सिंह ने कहा कि गुरू गोबिंद सिंह जी का जन्म सन् 1666 को पटना साहिब बिहार में नौवें पातशाह गुरू तेग बहादुर जी व माता गुजरी जी के घर हुआ था। गुरू जी को कवियों व भक्तों ने सरबंस दानी की संज्ञा दी है। गोबिंद राय जब 9 वर्ष के थे तो उनके पिता गुरू तेग बहादुर जी ने हिंदू धर्म की रक्षा के लिए दिल्ली के चांदनी चैक पर अपनी शहादत दी। गुरू जी ने 1699 में खालसा पंथ की स्थापना कर गुलामी व दास्तां की बेड़ियों में जकड़ी हुई हिंदुस्तान की जनता में नई जान फूंक दी। गुरू जी के दो बड़े साहिबजादों ने चमकौर की जंग में शहादत दी। जबकि दो छोटे साहिबजादांे को सरहिंद के नवाब वजीर खां ने जिंदा दीवार चिनवा कर व सिर कलम कर शहीद किया।
माता गुजर कौर जी ने भी पोतों की शहादत को देखकर अपने प्राण त्याग दिए। गुरूद्वारा कमेटी के प्रधान सेठ कुलदीप कुमार ने संगत को प्रकाश पर्व की बधाई दी। श्री अखंड पाठ साहिब की समाप्ति के बाद हजूरी रागी गुरदयाल सिंह, अमनदीप सिंह, चंद्रदीप सिंह, बलदीप सिंह, सचिन छाबड़ा, हर्ष भारती, हर्षप्रीत मनचंदा, चन्नी बेदी ने गुरवाणी गायन कर संगत को निहाल किया। अखंड पाठ साहिब की सेवा सचदेवा परिवार की ओर से की गई। संचालन गुरजोत सिंह सेठी ने किया। इस दौरान बालेंद्र सिंह, विजय गिरधर, सिमर लाल सचदेवा, गुरजंट सिंह, जसवंत सिंह, शोभा सिंह मनचंदा, चरण सिंह, जसप्रीत सिंह नागी, लवली सूरी, संदीप धींगड़ा, प्रांशुल गुगलानी, सिमरनजीत सिंह, सन्नी सेठी, बिट्टू कपूर, हरविंदर बेदी आदि मौजूद थे।

समीर चौधरी/महताब आज़ाद।

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