देवबंद पहुंचे राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष की मोहतमिम दारुल उलूम से मुलाकात, बोले दारुल उलूम ने शिक्षा के साथ पूरी दुनिया में इस्लाम का अमन शांति का संदेश पहुंचाया है।

देवबंद: राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के पूर्व कुलपति सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी नसीम अहमद ने सोमवार को दारुल उलूम देवबंद पहुंच कर मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी से मुलाक़ात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि दारूल उलूम देवबंद हमारी ऐसी अजीम विरासत से जिस से पूरी दुनिया को फायदा पहुंच रहा है।

पूर्व आईएएस अधिकारी नसीम अहमद ने दारूल उलूम देवबंद के रजिस्टर में अपने दिली जज़्बात लिखते हुए कहा कि दारुल उलूम देवबंद में आकर उन्हें रूहानी सुकून मिला है। उन्होंने संस्था के गेस्ट हाउस में मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम से गुफ्तगू के दौरान बताया कि लंबे अरसे से दारुल उलूम आना चाहते थे, आज यहां आकर दिल को बहुत सुकून पहुंचा है। इस दौरान उन्होंने दारुल उलूम देवबंद की शिक्षा, यहां की व्यवस्था, छात्रों  के रहन-सहन और इतिहास के संबंध में बातचीत की और कहा कि दारुल उलूम देवबंद दुनिया की ऐसी शैक्षणिक संस्था है जिससे प्रभावित हुए बगैर कोई नहीं रह सकता। उन्होंने यह भी कहा कि यह संस्था इंसान को इंसान बनाती है और पूरी दुनिया में शिक्षा के साथ इस्लाम के भाईचारे और अमन सलामती के परचम को बुलंद कर रही है।

इस दौरान मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि दारुल उलूम देवबंद और मदरसों का इतिहास देश प्रेम व भाईचारे का है। उन्होंने कहा कि दारुल उलूम देवबंद सहित सभी मदरसे देश प्रेम और भाईचारे का संदेश देते हैं। उन्होंने देवबंदी उलेमा द्वारा देश की आजादी में दी गई कुर्बानियों के संबंध में भी चर्चा की।
इस दौरान मौलाना अब्दुल मलिक कासमी, मुफ्ती सलीम अहमद बनारसी, डॉक्टर मोहम्मद वासिफ, हाजी सलीम व मोहम्मद अयाज आदि मौजूद रहे

रिजवान सलमानी/समीर चौधरी।

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