‘गजवा-ए-हिन्द’ को लेकर दिए गए पुराने फतवे पर एनसीपीसीआर ने दारुल उलूम देवबंद को घेरा, जिला प्रशासन को नोटिस भेज कर FIR करने का निर्देश, मोहतमिम ने NCPCR के क़दम पर जताया अफ़सोस।

देवबंद: विश्व प्रसिद्ध इस्लामी शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद की वेबसाइट पर 2009 में गजवा-ए-हिंद को लेकर डाले गए एक फतवे पर अब एनसीपीसीआर ने दारुल उलूम देवबंद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए जिला के आला अधिकारियों को पत्र भेजा है। 
DM दिनेश चंद्र सिंह ने बताया कि NCPCR से निर्देश मिले हैं, जिसके बाद SSP को इस बारे में लेटर भेज दिया गया है। देवबंद के CO और SDM को भी निर्देश दिया गया है कि मामले में तुरंत कार्रवाई की जाए। CO और SDM टीम के साथ मौके पर गए हैं। जल्द इसमें प्रभावी कार्रवाई हो जाएगी।

उधर, दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने बताया कि यह 15 साल पुराना 2009 का फतवा है, किसी ने सवाल किया था जिसका जवाब दिया गया था। इस संबध में स्थानीय अधिकारी दारुल उलूम देवबंद में आए थे जिन्हें सारी सूरत हाल बता दी गई है। अभी लिखित रूप में हमें किसी तरह का कोई नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है, नोटिस मिलने पर उसका कानूनी जवाब देंगे। उन्होंने एनसीपीसीआर के द्वारा उठाए गए इस कदम पर अफसोस जताते हुए कहा कि दारुल उलूम देवबंद वह संस्था है जिसने देश की आजादी में मुख्य भूमिका अदा की है। कहा कि फतवा किसी के ऊपर थोपा नहीं जाता है, बल्कि सवाल करने वाले का जवाब इस्लाम के मुताबिक दिया जाता है। 
दरअसल, किसी शख्स ने दारुल उलूम देवबंद से गजवा ए हिंद के संबंध में जानकारी चाही थी। पूछा था कि क्या हदीस में इसका कोई जिक्र है? दारुल उलूम देवबंद ने इसके जवाब संख्या 9604 में प्रसिद्ध पुस्तक सुन्नन अल-नसाई का हवाला देते हुए कहा कि इसमें गजवा ए हिन्द को लेकर एक पूरा चैप्टर है। फतवे में किताब को प्रिंट करने वाली कंपनी का भी नाम है। 
बहरहाल, दारुल उलूम के इस फतवे के बाद बाल संरक्षण आयोग कर अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने सहारनपुर के DM और SSP को पत्र भेजकर इस मामले में FIR दर्ज कराने को कहा है। उन्होंने कहा कि इस फतवे में गजवा-ए-हिंद को महिमामंडित किया गया है। देवबंद का फतवा बच्चों में अपने ही देश के खिलाफ नफरत की भावना पैदा कर सकता है। इससे बच्चों को गैरजरूरी मानसिक और शारीरिक पीड़ा हो सकती है। देवबंद की वेबसाइट पर ऐसी सामग्री का प्रकाशन नफरत भड़का सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आपत्तिजनक कंटेंट के प्रसारण से होने वाले किसी भी गलत परिणाम के लिए जिला प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
कानूनगो ने सहारनपुर जिला प्रशासन को इसका गंभीरता से संज्ञान लेते हुए मामले में FIR दर्ज करनी चाहिए। जिसके बाद सहारनपुर के DM दिनेश चंद्र ने एसडीएम और सीओ देवबंद को जांच कर कार्रवाई के आदेश दिए है।

डीएम सहारनपुर डॉ. दिनेश चंद्र ने कहा कि बाल संरक्षण आयोग के पत्र का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को दारुल उलूम प्रबंधन के पास भेजा गया है। पूरे मामले की जांच कर बाल संरक्षण आयोग को इसकी रिपोर्ट भेज दी जाएगी।

समीर चौधरी।

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